Saturday, 9 January 2021

प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक,

पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक,

प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे,

वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के अनंत ऊँचाई तक


कवि मनीष

****************************************


Friday, 8 January 2021

प्रेम संग जब रहे पवित्रता सदा,

हर कठिनाई पार करे ले जीवन सदा,

है सीता व राम पवित्र प्रेम के प्रतीक,

जो जुदा होके भी रहें एक सदा


कवि मनीष 

****************************************

Wednesday, 6 January 2021

नीत दिन करे जो सुमिरन राम का,

है बन जाता वो पहचान सम्मान का,

जो है मानता राम के अस्तित्व को,

है वो बन जाता प्रिय हनुमान का


कवि मनीष 

****************************************

Monday, 4 January 2021

सूरज के प्रकाश में हो जाते हैं और तारें ओझल,

रोशनीं सूरज की हीं करती है सवेरा हर पल,

विश्वास पर हीं है टिकी दुनिया सारी,

विश्वास से हीं है दिखता चमत्कार साईं का हर पल


कवि मनीष 

****************************************

Sunday, 3 January 2021

अनगिनत तारें भी मिलके दूर नहीं कर पाते अंधेरा,

पर एक चाँद कर देता है उजियारा हीं उजियारा,

भक्ति तो है रोशनीं का अथाह सागर,

पल भर में जो है कर देता सवेरा हीं सवेरा


कवि मनीष 

****************************************

Saturday, 2 January 2021

पत्थर पर लिखें जो श्री राम तो पत्थर भी तर गएँ,

सारे संकट क्षणभर में हीं विलीन हो गएँ,

है अद्भुत शक्ति श्री राम नाम में,

इसकी शक्ति से पतझड़ भी वसंत बन गएँ 


कवि मनीष 

****************************************


Friday, 1 January 2021

नया साल,नया जीवन लाए,

उमंगो से भरा मौसम लाए,

वसंत-बहार और छाया रहे सावन,

जीवन बाग में हर रंग के फूल खिलाए


कवि मनीष 

****************************************


Thursday, 31 December 2020

रंग जीवन में सुख और दुःख दोनों के हीं हैं होतें,

जो इस सत्य को हैं मानते वो कभी कमज़ोर नहीं पड़तें,

माता तो सदैव साथ रहतीं हैं अपनें उन संतानों के साथ,

जो उसको कभी अपनें हिर्दय से दूर नहीं करतें


कवि मनीष 

****************************************


Wednesday, 30 December 2020

ज्ञान बिना न जग चले,

ज्ञान बिना न संकट टले,

जो करे माँ सरस्वती के आराधना,

संग-संग ओहके समस्त वेद-पुराण चले


कवि मनीष 

****************************************


Tuesday, 29 December 2020

नीज मन न मैल रखिए,

मन को सदा निर्मल रखिए,

अगर है फ़ौलाद सा जो जिगर आपका,

तो भारत माता की सदा जय कहिए


कवि मनीष 

****************************************

Monday, 28 December 2020

राम नाम निकले हर घड़ी मुख से,

पार लगाए वो नईया जीवन दुःख से,

मुख कपि का लेकर अद्भुत,

करे भक्ति श्री राम की वो सदा दिल से


कवि मनीष 

****************************************


Sunday, 27 December 2020

रेत की दीवार ढ़ह जाती है, क्षणभर में,

पूनम कर देती है जग रोशन पल भर में,

हर ग़म है हो जाता पल भर में दूर,

जब छाता है माता रानीं का नूर सारे जग में 


कवि मनीष 

****************************************

Saturday, 26 December 2020

बस एक आदेश पर उड़ गएँ लंका को बजरंग,

लेके मन में निःस्वार्थ भक्ति का रंग,

करता है जो भक्ति तन-मन-धन से,

है मिलता उसको फल हमेशा मधुरता के संग


कवि मनीष 

****************************************

Friday, 25 December 2020

है कण-कण में जो समाया,

है जो फूलों के रंग और सुगन्ध बनके छाया,

है वो राम के सद्विचार,

जो बनकर रहतें सदा मानवता का साया


कवि मनीष 

****************************************


मानवता पर जब है होता ज़ुल्मो का प्रहार,

ख़तरे में जब है पड़ता सारा संसार,

तब जन्म लेता है,

एक फ़रिश्ता बनके इंसानियत का उपहार


क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएँ 


कवि मनीष 

****************************************


Tuesday, 22 December 2020

डमरू बजाए,करे नृत्य तांडव,

जटाधारी,त्रिनेत्रधारी,गंगाधर,

देव,मानव,दानव सब हैं भक्त उसके,

गुणों का है वो सृजनकर्ता और अवगुणों का है संहारक


कवि मनीष 

****************************************


Sunday, 20 December 2020

सुमन और सुगन्ध एक दूजे बिन हैं अधूरे,

वैसे हीं कृष्ण और राधा एक दूसरे बिन हैं अधूरे,

है इनकी प्रीत पराकाष्ठा प्रेम की,

तभी तो समस्त जगत् इनको है पूजे


कवि मनीष 

****************************************

Friday, 18 December 2020

आसमां को ज़मीं पर झुका जाते हैं,

सूरज,चाँद,सितारों को धरती पर उतार लाते हैं,

हैं राम बसें मेरे रोम-रोम में,

महावीर बजरंगी ये बार-बार दुहराते हैं 


कवि मनीष 

****************************************

Wednesday, 16 December 2020

जब पड़ती है ज़रूरत किसी को,

वीर रहता है तैयार सदा जां देनें को,

कौन कहता है, हम हैं अलग-अलग,

हो जातें हैं हम सब एक जब आती है बात शौर्य दिखानें को


विजय दिवस की हार्दिक बधाई

कवि मनीष 

****************************************


Tuesday, 15 December 2020

न जानें कौन सी की है, ख़ता,

क्यों देतें हैं लोग दग़ा,

प्रेम का सिला मिलता नहीं,

मिलता है सिर्फ़ धोख़ा,


कौन कहता है परमेश्वर करता नहीं ग़लती,

जहाँ करना नहीं था जिसे पैदा,

कर पैदा उसनें वहाँ उसकी ज़िन्दगी तबाह कर दी,


मेरे मुँह से निकलती है अब सिर्फ़,

बद्दुआ,


न जानें कौन सी की है, ख़ता,

क्यों देतें हैं लोग दग़ा,

प्रेम का सिला मिलता नहीं,

मिलता है सिर्फ़ धोख़ा


कवि मनीष 

****************************************


प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...