Tuesday, 13 October 2020

 क्या है सच और क्या झूठ इंसां को इससे क्या है मतलब,

आज के इंसां को तो सिर्फ़ ख़ुद से हीं है मतलब,

बस पेट भरनें को मिल जाए,

बाकि भाड़ में जाए दुनिया के सारे करतब


कवि मनीष 

****************************************


Sunday, 11 October 2020

जटा से उसके निकलती है गंगा,

भुजंगधारी है वो मस्त मलंगा,

चंद्रमौली,गंगाधर,त्रिशूलधारी नाम हैं उसके अनेक,

है वो कैलाशी,पालनकर्ता त्रिलोक का,


कवि मनीष

****************************************


Friday, 9 October 2020

है रात अंधेरी घनघोर तो क्या हुआ,

है कोई नहीं साथ तो क्या हुआ,

हम अपनें दम पर,

आसमान को झुका देंगे,


चमकते सूरज की रोशनीं को भी,

अपनीं चमक से फ़िका कर देंगे,

है पर्वतों सा अटल इरादा हमारा,

लहरें सर पटक कर अपनें घर को हीं जाएँगी, 


है रात अभी हावि तो क्या हुआ,

सुबह को अपनीं दहलीज़ पर एक दिन ज़रूर लाएँगे,


है रात अंधेरी घनघोर तो क्या हुआ,

है कोई नहीं साथ तो क्या हुआ,

हम अपनें दम पर,

आसमान को झुका देंगे,


चमकते सूरज की रोशनीं को भी,

अपनीं चमक से फ़िका कर देंगे 


कवि मनीष 

****************************************


Tuesday, 6 October 2020

नदि बहती है चट्टानों को धकेलकर,

सूरज आता है अंधियारे को चीड़कर,

वैसे हीं जब मानवता होती है संकट में,

तब-तब आता है साईं ज़रूर धरती पर


कवि मनीष 

****************************************


Monday, 5 October 2020

हर जीव में रहता है ईश्वर,

लेना किसी की जान सहता नहीं परमेश्वर,

अगर इंसान जीवों की जान यूँ ही लेता जाएगा, 


तो एक ना एक दिन उसका फल उसे अवश्य मिलेगा,


आज जिन निरीह पशुओं की जान तुमनें ली है,

तो याद रख,

हर पापी को सज़ा मिलती हीं मिलती है,

तेरे पापों की सज़ा तुझको,

इंसां हीं देगा,


और परमेश्वर लाठी की मार तुझे तेरे वास्तविक अंजाम तक ले जाएगा,


गुनहगार टिकता नहीं लंबे समय तक धरती पर,


हर जीव में रहता है ईश्वर,

लेना किसी की जान सहता नहीं परमेश्वर,

अगर इंसान जीवों की जान यूँही लेता जाएगा,


तो एक ना एक दिन उसका फल उसे अवश्य मिलेगा 


कवि मनीष 

****************************************


Saturday, 3 October 2020

ओ माँ शेरोवाली,

ओ माँ पहाड़ावाली,

हैं तेरे अनेकों रूप,


जगत् को सारे चलाती है तू,

तेरी चमक छाई है हरसू,


तू है सबसे निराली,


ओ माँ शेरोवाली,

ओ माँ पहाड़ावाली,


अपनीं कृपा सदा बरसाना माँ,

सबके कष्ट तू हरना माँ,


किसी को भी ख़ाली न लौटाना माँ,


जो हैं तेरे दर आते सवाली,


ओ माँ शेरोवाली,

ओ माँ पहाड़ावाली,


हैं तेरे अनेकों रूप,


जगत् को सारे चलाती है तू,

तेरी चमक छाई है हरसू,


तू है सबसे निराली,


ओ माँ शेरोवाली,

ओ माँ पहाड़ावाली 


ओ माँ शेरोवाली,

ओ माँ पहाड़ावाली 


कवि मनीष 

****************************************


Friday, 2 October 2020

एक था गाँधी,

जैसे आँधी,

दुबला-पतला सा,

पर डरता न ज़रा भी,


मशाल जली क्रांति की,

पर किसी से जली न सदा जी,

केवल एक नें जलाई जो मशाल क्रांति की,

वो जलती रही सदा जी,


उस मशाल के दहक में,

जल गए सारे ज़ालिम जी,

कहनें वाले तो कहते हीं हैं रहते,

पर था जो दम उसकी लाठी में,

वो था कहाँ गोले,बारूद में जी,


क्रांति तो बहोतों नें की,

पर उनमें था कहाँ वो दम जी,

जो था उस फ़कीर में जी,


जिसके सोंच के आगे,

झुक गया वक्त भी,


एक था गाँधी,

जैसे आँधी,

दुबला-पतला सा,

पर डरता न ज़रा भी 


महात्मा गाँधी जी के जयंती की अनंत शुभकामनाएँ 

कवि मनीष 

****************************************

छोटा सा था क़द,

और बुद्धि थी जैसे शमशीर,

हर अर्चन को जो देता था,

पल भर में चीड़,


था वो राष्ट्र की छतरी,

है कहता ज़माना जिसे लाल बहादुर शास्त्री,


था जो देश की ढ़ाल,

जवानों और कृषकों का दुलार,

हरता था जो पल भर में,

राष्ट्र की पीड़,


छोटा सा था क़द,

और बुद्धि थी जैसे शमशीर,

हर अर्चन को जो देता था,

पल भर में चीड़,


था जो देश का वसंत-बहार जी,

है कहता ज़माना जिसे लाल बहादुर शास्त्री,


था जो देश की छतरी,

है कहता ज़माना जिसे लाल बहादुर शास्त्री 


लाल बहादुर शास्त्री जी के जयंती की अनंत शुभकामनाएँ 


कवि मनीष 

****************************************




प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...