Thursday, 17 September 2020

 प्रकृति की मनमोहक काया गढ़नें वाले,

पृथ्वी को जीवन आवास बनानें वाले,

जय विश्वकर्मा भगवान की,

जय बाबा विश्वकर्मा की,


हर पुष्प,हर सुमन तेरे हीं गुण गाए,

हर जन,देवगण सब तेरे हीं गुण गाए,

लौह को पिघलाकर आकर बदलनें वाले,

जय विश्वकर्मा भगवान की,

जय बाबा विश्वकर्मा की,


प्रकृति की मनमोहक काया गढ़ने वाले,

पृथ्वी को जीवन आवास बनानें वाले,

सदा जय हो विश्वकर्मा भगवान की,

सदा जय हो विश्वकर्मा बाबा की


विश्वकर्मा पूजा की अनंत शुभकामनाएँ 


कवि मनीष 

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Wednesday, 16 September 2020

 माता गंगे,

माता गंगे,

जय हो तेरी माता गंगे,


सदा निश्छलता से बहनें वाली,

अमृत सबको पिलानें वाली,

धरती माँ को सींचनें वाली,


हर विपदा हरनें वाली,


लगे क्यों न तेरे भी जयकारे,

जय हो तेरी माता गंगे,

सदा जय हो तेरी हे माता गंगे,


पर स्वच्छता जब तेरी दूषित होती,

फिर क्रोध तू अपनीं दर्शाती,


सबको तू ये सबक है देती,

स्वच्छता में हीं तू है रहती,


तेरे जल में है वो शक्ति,

अमृत भी आगे जिसके कम लगे,


माता गंगे,

माता गंगे,

जय हो तेरी माता गंगे,


माता गंगे,

माता गंगे,

जय हो सदा तेरी माता गंगे 


कवि मनीष 

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Tuesday, 15 September 2020

 हे शेरोवाली,

सारे जग की रखवाली,

तुझसे हीं आती है सारे जग में दिवाली,


शक्ति तेरी है सबसे बड़ी,

हे आदिशक्ति,

तू तो है महाशक्ति,


तुझसे हीं है जग भाग्यशाली,


हे शेरोवाली,

सारे जग की रखवाली,

तू हीं है करती,


हे माँ ज्योतावाली,


चमत्कारों का चमत्कार,

है तू तो करती,

निर्धन की झोली तू पल भर में भरती,


हे माँ भवानीं,

हे अम्बे रानीं,


तेरी महिमा तो है सबसे निराली,


हे शेरोवाली,

सारे जग की रखवाली,

तुझसे हीं आती है सारे जग में दिवाली,


हे शेरोवाली,

सारे जग की रखवाली,

तू हीं है करती,


हे माँ ज्योता वाली


कवि मनीष 

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Monday, 14 September 2020

हिंदी समस्त भाषाओं का संगम है,

हिंदी समस्त भावनाओं का दर्पण है,

हिंदी रंग-बिरंगे बादलों का है समूह,

हिंदी हरदम महकता चंदन है 


कवि मनीष 

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Sunday, 13 September 2020

 मुस्कुराना परमेश्वर का वरदान है,

ये जीवन का प्रेम और सम्मान है,

हर हाल में मुस्कुराता है जो,

उसी पे परमात्मा होता मेहरबान है 


कवि मनीष 

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Saturday, 12 September 2020

 कहनें को कुछ न कुछ हर लोग कहतें हैं,

सहनें को कुछ न कुछ हर लोग सहतें हैं,

पर कमजोरी उनको छूती नहीं,

जो दिल से जय माता की कहतें हैं 


कवि मनीष 

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Thursday, 10 September 2020

 ताक़त के नशे में जब चूर है होती सत्ता,

उसे अपनें अहंकार के आगे कुछ नहीं दिखता,

जो किया है कुकृत्य तूनें,

तुझको कभी करेगा नहीं क्षमा विधाता


कवि मनीष 

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प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...