Wednesday, 16 September 2020

 माता गंगे,

माता गंगे,

जय हो तेरी माता गंगे,


सदा निश्छलता से बहनें वाली,

अमृत सबको पिलानें वाली,

धरती माँ को सींचनें वाली,


हर विपदा हरनें वाली,


लगे क्यों न तेरे भी जयकारे,

जय हो तेरी माता गंगे,

सदा जय हो तेरी हे माता गंगे,


पर स्वच्छता जब तेरी दूषित होती,

फिर क्रोध तू अपनीं दर्शाती,


सबको तू ये सबक है देती,

स्वच्छता में हीं तू है रहती,


तेरे जल में है वो शक्ति,

अमृत भी आगे जिसके कम लगे,


माता गंगे,

माता गंगे,

जय हो तेरी माता गंगे,


माता गंगे,

माता गंगे,

जय हो सदा तेरी माता गंगे 


कवि मनीष 

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