Sunday, 5 July 2020

अशांत मन को जो कर दे शांत,
जो समस्त नकरात्मकताओं का कर दे अंत,
है ऐसी शक्ति समाई इनमें,
हैं ये वो परमशक्ति जो कर दें क्षणभर में रंक को राजा और राजा को रंक

कवि मनीष

Saturday, 4 July 2020

गुरू बिना न मिले ज्ञान,
गुरू बिना न मिले सम्मान,
गुरू हीं है होता सच्चा मार्गदर्शक,
गुरू बिना न जागे स्वाभिमान 

गुरू पूर्णिमा की ढ़ेरों शुभकामनाएँ 
कवि मनीष 
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आती बहार तो खिल जातें हैं फूल,
आता है पतझड़ तो झड़ जातें हैं फूल,
एक रंगीन मौसम का आता है मेला,
जब माता के चरणों की उड़ती है धूल

कवि मनीष 
अध्यात्म को जग-जग तक पहुँचाकर,
चला गया वो धरती को छोड़कर,
युवाओं के भीतर सकारात्मक प्राण फूंकने वाले,
तुम्हारे ज्ञान को हमेशा याद रखेगा हर कोई उम्रभर

कवि मनीष 
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Friday, 3 July 2020

नृत्य के दुनिया का एक ज़िंदा दिल इंसान,
चला गया कर पूरे अपनें सारे ख़्वाब छोड़कर जहान

कवि मनीष 

Thursday, 2 July 2020

हो सकता है वो कैसे बेसहारा,
जिसको देती हैं माता सहारा,
है हो जाता वो सबसे ताक़तवर,
जिसपे हैं लुटाती माता अपना प्रेम सारा

कवि मनीष 

Wednesday, 1 July 2020

हर रंग समाया है उसमें,
है काल को हराया उसनें,
सारे जग को विष से बचाया,
कहते हैं महाकाल उसे सारे जग में   

कवि मनीष 

प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...