Saturday, 7 March 2020

राम नाम है सबसे बड़ा,
राम से बड़ा कोई नहीं,
जब है लांगता पाप अपनीं सीमा,
मृत्यु से बड़ा कोई नहीं,

जब उठाता है सर अपनां अभिमान,
राम के प्रहार से बड़ा कोई नहीं,
जब है फैल जाता शूलों का संसार,
वसंत-बहार से बड़ा कोई नहीं,

जब आती है बात मर्यादा की,
राम से बड़ा कोई नहीं,
राम नाम है सबसे बड़ा,
राम से बड़ा कोई नहीं,

राम से बड़ा कोई नहीं 

कवि मनीष 
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Friday, 6 March 2020


है समस्त कामनाओं की पूर्ति,
होती है जिस दर पर,
कहता है बाबा अमरनाथ,
सारा जग उसे जय करकर,

देवताओं का मस्तक भी है झुक जाता,
जिस दर पर,
कहता है बाबा बर्फ़ानीं उसे,
सारा जग जयकारे लगाकर,

ब्रह्माण्ड की समस्त शक्ति,
है एक हो जाती जिस दर पर,
कहता है बाबा त्रिलोकनाथ उसे,
सारा जग जय करकर,

है समस्त कामनाओं की पूर्ति,
होती है जिस दर पर,
कहता है बाबा अमरनाथ,
सारा जग उसे जय करकर 

कवि मनीष 
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Thursday, 5 March 2020

माँ वैष्णों देवी के दरबार 
में होतीं हैं मुरादें पूरी सारी,
सजती है सपनों की
रंग-बिरंगी फुलवारी,

झूमती है धरती,
झूमता है गगन,
झूमता है जीवन,
सजती है आशाओं की फुलवारी,

माँ वैष्णों देवी के दरबार 
में होतीं हैं मुरादें पूरी सारी,
सजती है सपनों की,
रंग-बिरंगी फुलवारी 

कवि मनीष 
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Wednesday, 4 March 2020

निराला है वो सबसे,
चमत्कारी है वो सबसे,
कहता है सारा जग जिसे,
शिव-शंकर भुजंगधारी दिल से,

है वो महेश्वर,
है वो महाकाल,
है वो सृष्टि का केंद्र,
कहता है कैलाशी सारा जग जिसे दिल से,

निराला है वो सबसे,
चमत्कारी है वो सबसे,
कहता है सारा जग जिसे,
शिव-शंकर भुजंगधारी दिल से,

कवि मनीष 
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Tuesday, 3 March 2020


चूमता है अमरत्व मस्तक,
उनका जो होतें हैं शहीद मातृभूमि पर,
होता है स्वर्णिम जीवन उनका,
विजय पताका लहराते हैं जो शत्रु के वक्ष पर,

अपना सर्वस्व जो कर दे निछावर वतन पर,
जो धड़कता है जीवन बनकर,
जो बहता है लहू बनकर,
वो रहता है हर जुबां पर फ़ौजी बनकर,

चूमता है अमरत्व मस्तक,
उनका जो होतें हैं शहीद मातृभूमि पर,
होता है स्वर्णिम जीवन उनका,
विजय पताका लहरातें हैं जो शत्रु के वक्ष पर

कवि मनीष 
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Monday, 2 March 2020

मेरी भारत माँ,
के धरती पर,
गाता है जीवन,
लहराता है जीवन,
बलख़ाता है जीवन,

पशु,पक्षी सब,
रहते हैं हिल मिलकर,
जहाँ हरियाली है,
लहराती झूम झूमकर,

ऐसी माता के हैं,
हम संतान,
जिसके माला में हैं,
हर रंग के मोती,

जो बनाता है इसे महान,

आओ ! हम सब मिलकर,
भारत माँ का क़र्ज़ चुकाएँ,
द्वेष, नफ़रत और न हिंसा फैलाएँ,

हम सब हीं तो हैं इसका अभिमान,

हमारी भारत माँ हीं तो है,
हम सभी का जीवन दर्पण,

मेरी भारत माँ,
के धरती पर,
गाता है जीवन,
लहराता है जीवन,
बलख़ाता है जीवन 

कवि मनीष 
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Sunday, 1 March 2020

जब तू बंसी बजाए,
प्रेम हर ओर फैल जाए,
सारा गगन पल भर में,
ग़ुलाबी हो जाए,

जीवन से मुक्त हो जाए,
हर अर्चन,
हर ओर बज उठे,
मधुर सरगम,

मन मेरा निराला,
प्रेम गीत गाए,
जब मेरे गिरिधर तू,
मुरलीधर बन जाए,

जब तू बंसी बजाए,
प्रेम हर ओर फैल जाए,
सारा गगन पल भर में,
ग़ुलाबी हो जाए 

कवि मनीष 
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प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...