Friday, 18 December 2020

आसमां को ज़मीं पर झुका जाते हैं,

सूरज,चाँद,सितारों को धरती पर उतार लाते हैं,

हैं राम बसें मेरे रोम-रोम में,

महावीर बजरंगी ये बार-बार दुहराते हैं 


कवि मनीष 

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Wednesday, 16 December 2020

जब पड़ती है ज़रूरत किसी को,

वीर रहता है तैयार सदा जां देनें को,

कौन कहता है, हम हैं अलग-अलग,

हो जातें हैं हम सब एक जब आती है बात शौर्य दिखानें को


विजय दिवस की हार्दिक बधाई

कवि मनीष 

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Tuesday, 15 December 2020

न जानें कौन सी की है, ख़ता,

क्यों देतें हैं लोग दग़ा,

प्रेम का सिला मिलता नहीं,

मिलता है सिर्फ़ धोख़ा,


कौन कहता है परमेश्वर करता नहीं ग़लती,

जहाँ करना नहीं था जिसे पैदा,

कर पैदा उसनें वहाँ उसकी ज़िन्दगी तबाह कर दी,


मेरे मुँह से निकलती है अब सिर्फ़,

बद्दुआ,


न जानें कौन सी की है, ख़ता,

क्यों देतें हैं लोग दग़ा,

प्रेम का सिला मिलता नहीं,

मिलता है सिर्फ़ धोख़ा


कवि मनीष 

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Monday, 14 December 2020

गजानन,गणाधिप,लम्बोदर,
नाम से हीं परमबुद्धि है होता उजागर,
है होता सर्वप्रथम पूजन उसका,
है उसके समक्ष अति तुच्छ बुद्धि का सागर

कवि मनीष 
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Sunday, 13 December 2020

जीवन संग चले मृत्यु भी संग-संग,

जीवन के रहे न कभी एक समान रंग-ढ़ंग,

और जो बसावे राम भक्त के मन में,

ओहके जीवन नभ से बरसे वसंत-बहार हर क्षण


कवि मनीष 

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Thursday, 10 December 2020

जब अन्नदाता के मन में चुभ जाती है राजनीति की शूल,

तब निर्बल है हो जाती अर्थव्यवस्था की मूल,

मंडरानें लगते हैं भूखमरी के बादल काले,

सबक देता है वो उनको जिसनें की है भूल


कवि मनीष 

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Wednesday, 9 December 2020

मूर्छित पड़े लक्ष्मण को देख पर्वत दियो उठाए,

प्रेम देख बजरंगी का श्री राम लियो गले लगाए,

जेहके मन बहे प्रीत की धारा निर्मल,

ओहके जीते जी स्वर्ग मिल जाए


कवि मनीष 

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प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...