Sunday, 25 October 2020

जाये के दुखवा सहे के परे हीं,

माई तोहरा के बिदा करके परे हीं,

अगिले बरस मईया फिर तोहके बुलाईम,

अभी त बिदा तोहके करे के परे हीं,


जईसे सूरूज बाटे गगनवा में माई,

अईसे तोहार बाट जोहे के परे हीं,

तोहार जुदाई माई हमार दिल के बर सताई,

पर तोहके माई बिदा करे के परे हीं,


जाये के दुखवा सहे के परे हीं,

माई तोहरा के बिदा करके परे हीं,

अगिले बरस मईया फिर तोहके बुलाईम,

अभी त बिदा तोहके करे के परे हीं 


कवि मनीष 

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Thursday, 22 October 2020

चलो माता के द्वार भक्तों,

चलो माता के द्वार भक्तों,

माता करेंगी उद्धार भक्तों,


चलो माता के द्वार भक्तों,

चलो माता के द्वार,


माता के दर पे शीश नवाओ,

मन चाहे वर तुम पाओ,

हर घड़ी तुम अम्बे गुण गाओ,


अम्बे करेगी उद्धार भक्तों,


चलो माता के द्वार भक्तों,

चलो माता के द्वार भक्तों,

माता करेंगी उद्धार भक्तों,


चलो माता के द्वार भक्तों,

चलो माता के द्वार 


कवि मनीष 

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Wednesday, 21 October 2020

करते हैं हम,

तेरी आरती,

करते हैं हम,

तेरी आरती,

ओ मईया भवानीं,

ओ मईया भवानीं,


तुझसे डरते हैं सारे दुर्जन,

करते हैं हम तेरा पूजन,


ओ मईया भवानीं,

ओ मईया भवानीं,


करती अम्बे तू सिंह की सवारी,

तू तो है माता अति चमत्कारी,


ओ मईया भवानीं,

ओ मईया भवानीं,


करते हैं हम,

तेरी आरती,

करते हैं हम,

तेरी आरती,

ओ मईया भवानीं,

ओ मईया भवानीं 


कवि मनीष 

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Monday, 19 October 2020

 हे अम्बे माँ,

तू है दुःखहरणी माँ

भुजाओं में तेरे है महाबल,


तू है महाशक्ति माँ,

हे अम्बे माँ,

तू है दुःखहरणी माँ,


है ठंडक तुझमें सुबह की,

है तेज़ तुझमें दिवा की,


तू है कष्टहरणी माँ,

तू है दुःखहरणी माँ,


है सृष्टि तुझमें समाई,

तू है सबकी देवी माँ,


हे अम्बे माँ,

तू है दुःखहरणी माँ,

भुजाओं में तेरे है महाबल,


तू है महाशक्ति माँ,

हे अम्बे माँ,

तू है दुःखहरणी माँ 


कवि मनीष 

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Saturday, 17 October 2020

माता ओ शेरोवाली,

है सबसे तू निराली,

है तू फूलों सी कोमल,

और है तू अग्नि की भी डाली,


माता ओ शेरोवाली,

है सबसे तू निराली,


है धधक तुझमें क्रोध की भी,

है ठंडक तुझमें चाँद की भी,

है तू तो ममता की वाणी,

है तू तो सबसे निराली,


माता ओ शेरोवाली,

है सबसे तू निराली,


माता ओ शेरोवाली,

है सबसे तू निराली 



आप सभी नवरात्रि की असीम शुभकामनाएँ 

कवि मनीष 

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Thursday, 15 October 2020

 कठिन राह पे जो चलनें से नहीं डरते हैं,

पर्वतों की ऊँचाई से जो नहीं घबराते हैं,

एक दिन वो बनते हैं चमकता सूर्य,

जिसकी चमक से हर मंज़र जगमगाते हैं 


कवि मनीष 

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 भुजाओं में ताक़त है बेमिसाल,

जिसके ज्ञान के समक्ष टिकता है न कोई सवाल,

ज्ञान का अथाह सागर बहता है जिसमें,

हैं वो बजरंगी,हनुमान,पवनपुत्र,केसरी नंदन,अंजनी के लाल


कवि मनीष 

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प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...