Monday, 6 April 2020

जय गंगे माँ 
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जय गंगे माँ,
जय गंगे माँ,
सारे जग को अमृत पिलानें वाली,
जय गंगे माँ,
जय जीवन दायनीं माँ,

सारी धरती को,
हरियाली देनें वाली,
समस्त जग को,
जीवन देनें वाली,
धरा को वसंत का ताज,
पहनानें वाली,

जय गंगे माँ,
जय गंगे माँ,
सारे जग को अमृत पिलानें वाली,
जय जीवन दायनीं माँ,

जय गंगे माँ  

कवि मनीष 
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Sunday, 5 April 2020

एक दीप जली जो आशा की,
हो गई मृत्यु निराशा की,
हमनें जो ठाना कुछ करनें को,
कमर टूट गई मौत के आक़ा की

कवि मनीष 
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जलती है ज्योत आशाओं की,
बुझती है ज्योत निराशाओं की,
हर अर्चन घुटनें टेकती है जहाँ,
वो दर है शिरडी वाले साईं की,

है रहता सत्य वहाँ मौन नहीं,
इच्छाएँ वहाँ कभी मरतीं नहीं,
बुराईयों का अस्तित्व है जलता जहाँ,
वो दर है शिरडी वाले साईं की,

जलती है ज्योत आशाओं की,
बुझती है ज्योत निराशाओं की,
हर अर्चन घुटनें टेकती है जहाँ,
वो दर है शिरडी वाले साईं की 

कवि मनीष 
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Saturday, 4 April 2020


ममतामई जय माता की,
करूणामई जय माता रानीं की,
अलौकिक शक्तियों की स्वामिनीं,
जय माँ अम्बे की,
जय माँ जगदम्बे की,

जिसकी कृपा से,
पतझड़ पे छा जाए वसंत,
जो करती है मुरादें,
पूरी सबकी तुरंत,

ममतामई जय माता की,

ममतामई जय माता की,
करूणामई जय माता रानीं की,
अलौकिक शक्तियों की स्वामिनीं,
जय माँ अम्बे की,
जय माँ जगदम्बे की 

कवि मनीष 
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Friday, 3 April 2020


जयकारों से है गूंज जाता,
जहाँ अम्बर,
वो है माता वैष्णों का दर,
जहाँ है जल जाता दुर्भाग्य भस्म होकर,
वो है माता वैष्णों का दर,

है भानु बिख़ेरता जहाँ अद्भुत प्रताप,
है शशि की मनमोहक छटा छेड़ती जहाँ शीतलता का राग,
है जहाँ वसंत बिख़ेरता प्रसन्नता भर-भर,
वो है माता वैष्णों का दर,

जयकारों से है गूंज जाता,
जहाँ अम्बर,
वो है माता वैष्णों का दर,
जहाँ है जल जाता दुर्भाग्य भस्म होकर,
वो है माता वैष्णों का दर 

कवि मनीष 
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Thursday, 2 April 2020

राम नाम जपते रहो,
राम नाम है अति पावन,
है जीवन की जो अनंत ऊँचाई,
वो राम नाम का है अम्बर,

राम नाम जपते रहो,
राम नाम है अति पावन,

है शालीनता और ताक़त का संगम,
है वो राम का अद्भुत उपवन,
समक्ष अहंकार जिसके टीकता नहीं,
वो राम नाम का है पर्वत,

राम नाम जपते रहो,
राम नाम है अति पावन,

राम नाम जपते रहो,
राम नाम है अति पावन,
है जीवन की जो अनंत ऊँचाई,
वो राम नाम का है अम्बर,

राम नाम जपते रहो,
राम नाम है अति पावन 

कवि मनीष 
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Wednesday, 1 April 2020

जय भारत माँ 
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जय भारत माँ,
जग को प्रेम का देनें संदेश वाली,
जय भारत माँ,
जय भारत माँ,

विभिन्न रंगों से धरती को रंगनें वाली,
जय देवी माँ,
जय भारत माँ,

आकाश में लहरानें वाली अमर ध्वज,
जय रंग-बिरंगी माँ,
जय अद्भुत माँ,
जय भारत माँ,

मानवता का संदेश देनें वाली,
एकता का संदेश देनें वाली,
जय जन-जन की माँ,
जय भारत माँ,

जय भारत माँ,
जग को प्रेम का देनें संदेश वाली,
जय भारत माँ,
जय भारत माँ 

कवि मनीष 
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प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...