नानक न गिरे ज़ुल्म के आगे,
नानक नाम से हर ज़ुल्मी भागे,
न रूके कृपाण तब तलक,
जब तलक सूरज अमन का न जागे
गुरू नानक जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ
कवि मनीष
****************************************
फूलों नें बनाई सेज बहार की,
गगन नें पुष्पों की बौछार की,
जब राधा-कृष्ण नें किया श्रृंगार,
तब चद्रंमा नें अपनें शीतल किरणों की बौछार की
कवि मनीष
****************************************
ख़ून से रंग चुकी थी धरती,
जीवन मौत के चंगुल में थी फंस गई,
तब शौर्य से लिखी वीरों नें,
मानवता की एक नई कहानी
ये रचना मैंनें २६/११ पर लिखी है ।
कवि मनीष
****************************************
प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...