हर उपवन में सबसे अधिक जो महकता है,
आकाश में सबसे अधिक जो चमकता है,
वो साईं की है कृपा,
मिलती है हिर्दय से याद उसे जो करता है
कवि मनीष
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हे कृष्ण जब तू बंसी बजाए,
तेरी तान सब को लुभाए,
पर मेरे हिर्दय को,
तेरे बंसी ख़ूब रूलाए,
कहे मीरा कृष्ण से,
स्वप्न में दियो मोहे दर्शन,
क्यों सच में न समीप आए,
शूलों पर चली मैं,
और दिया सर्वस्व लुटाए,
पर जीते जी तू मुझको मिला न,
तो मैंनें मृत्यु को लिया गले लगाए,
आज समस्त संसार मोहे,
तुझसे जोड़ के मोहे बुलाए,
यही तो थी मोरे जीवन की कामना,
सो अब मोरा जीवन मोहे भाए,
हे कृष्ण जब तू बंसी बजाए,
तेरी तान सब को लुभाए,
पर मेरे हिर्दय को,
तेरी बंसी ख़ूब रूलाए
कवि मनीष
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स्वतंत्रता दिवस की मुबारक़बाद,
रहे हमारा देश हमेशा आबाद,
स्वतंत्र आकाश में सदा लहराए,
हमारा तिरंगा बार-बार,
धानीं चुनर सदा ओढ़े रहे धरती सदा हमारे वतन की,
सदा लहराती रहे चुनर भारत माता की,
कभी कम न हो हमारे राष्ट्र का सम्मान,
हर सुबह हो निराली,चमकदार हो हर रात,
स्वतंत्रता दिवस की मुबारक़बाद,
रहे हमारा देश हमेशा आबाद,
स्वतंत्र आकाश में सदा लहराए,
हमारा तिरंगा बार-बार
कवि मनीष
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आया जन्माष्टमी का त्यौहार,
बिखरे हरसू पुष्प हज़ार,
आया जन्माष्टमी का त्यौहार,
मन गाए मीठे राग,
सारी सृष्टि बजाए मधुर साज़,
किशन-कन्हैया के आगमन में,
सारी सृष्टि नें किया अद्भुत श्रृंगार,
चारों तरफ़ छाई गई,
बहार हीं बहार,
आया जन्माष्टमी का त्यौहार,
बिखरे हरसू पुष्प हज़ार,
आया जन्माष्टमी का त्यौहार
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की अनेकों शुभकामनाएँ
कवि मनीष
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प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...