Sunday, 7 June 2020

राम नाम है बसा रोम-रोम में मेरे,
भज तू राम को साथ मैं भी आऊँगा घर तेरे,
छल,कपट त्याग कर बस कर सिमरन प्रभु का,
मैं बजरंगी चल पड़ूँगा साथ तेरे

कवि मनीष 
****************************************

Saturday, 6 June 2020

हाथ में तिरंगा लेके खड़े हैं वीर,
है किसमें ताक़त जो रख दे फ़ौलादों को चीड़,
आना है जिसको आए,
भूखे शेर हैं अब भारत के वीर

कवि मनीष 
****************************************

Friday, 5 June 2020

जीवन है बन जाता उनका गंगा सा निर्मल,
जो जपते हैं गंगाधर का नाम हरपल,
एक लौ है आशा की प्रज्वलित रहती,
जो बसा कर हैं रखते हिर्दय में भोले नाथ को हरपल 

कवि मनीष
**************************************** 

Thursday, 4 June 2020

बेज़ुबानों का दर्द जब निकल के बाहर आता है,
चीख़ों से सारा मंज़र दहल जाता है,
मेरी नज़र में बेज़ुबानों को मारनें वालों को भी मिलनीं चाहिए, सज़ा ए मौत,
बस यही इस कवि का दिल कहता है 

कवि मनीष 
****************************************

Wednesday, 3 June 2020

बुरे वक्त में देकर साथ हमारा,
छोड़ती नहीं माता अपनें संतानों को कभी बेसहारा,
बांध कर ममता की डोर से,
माँ देती है फूलों का संसारा

कवि मनीष 
****************************************

Tuesday, 2 June 2020

रहमत होती है परमेश्वर की उनपे,
करतें हैं जो सबकुछ क़ुर्बान वतन पे,
आग से भरे रस्ते पर भी चल जातें हैं,
जो रखतें हैं भारत माँ को सदा दिल में,

देश तो है बस मिट्टी की सौंद्धि खुशबू,
कर देती है मन को मंत्रमुग्ध,
जब फैलती है हरसूं,
बस वही चमकतें हैं हिंद के नभ में,
जो रखतें हैं भारत माँ को सदा दिल में,

रहमत होती है परमेश्वर की उनपे,
करतें हैं जो सबकुछ क़ुर्बान वतन पे,
आग से भरे रस्ते पर भी चल जातें हैं,
जो रखतें हैं भारत माँ को सदा दिल में 

कवि मनीष 
****************************************

Monday, 1 June 2020

है जीवन तो राम का और न किसी का,
है जीवन तो भगवान का और न किसी का,
है चलती नाव जीवन की परमात्मा के हीं सागर में,
है जीवन तो श्री राम का और न किसी का 

कवि मनीष 
****************************************

प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...