Friday, 9 August 2019

जीवन के वे पल मुझे बड़े प्यारे थें,
जब साथ मेरे ममता के किनारे थें,
दिन का हर पहर आशाओं से था भरा हुआ,
हम दोनों एक दूसरे के जीनें के सहारे थें 
कवि मनीष 

Thursday, 8 August 2019

रूमानीं मुक्तक

हो तुम वो चाँद जिसमें कोई दाग नहीं,
हो तुम वो बाग़ जिसमें कोई ख़ार नहीं,
तुम हो लाली सहर की,
तुम हो वो आफ़ताब जिसमें कोई आग नहीं 
कवि मनीष 

Wednesday, 7 August 2019

मन को कर ले क़ाबू मंज़िल जरूर मिलेगी,
दे ख़ुद का साथ तू मंज़िल जरूर मिलेगी,
बस मन को कर एकाग्र बढ़ता जा,
बस इस बात को बांध ले गांठ तू मंज़िल जरूर मिलेगी 
कवि मनीष 

Tuesday, 6 August 2019

श्रीमती सुषमा स्वराज के लिए..

हुआ बड़ा गहरा शोक आपके जानें का,
नहीं भर पाएगा जगह कोई आपके जानें का
कवि मनीष 
अब भारत का स्वर्ग वाकई में स्वर्ग होगा,
सारा देश एकजुट होकर सर्वशक्तिशाली बनेगा,
अब बचा एक हिस्सा और लेनें की बारी है,
तब भारत का स्वर्ग विश्व का भी स्वर्ग होगा
कवि मनीष 

Sunday, 4 August 2019

रूबाई

२२२२,२२२,२२२
जीवन के हर पल को तू जी हर दम,
जीवन के हर क्षण को तू जी हर दम,
इक दिन तो जाना है सबको हीं तो,
जीवन के हर पल को तू जी हरदम

रूबाई
कवि मनीष 

Saturday, 3 August 2019

है इन्सान तू तो..

है इन्सान तू तो औरों से भी प्यार कर,
ईर्ष्या को त्याग कर जीवन का उद्धार कर,
ख़ुद की मेहनत से पहन सफ़लता का ताज़,
औरों के सफ़लता के पीछे की मेहनत को तू सलाम कर
कवि मनीष 

प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...