Wednesday, 15 July 2020

क्या कहता है आसमां जीवन का है पता मुझे,
क्या कहती है बिखरती खुशबू है पता मुझे,
कौन है कहता कभी-कभी देर तक रात का है सिलसिला होता,
सर पे हाथ जो है मेरी माता का, क्या होती है सुबह बस है पता मुझे

कवि मनीष
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