जीवन में खुशियों की बौछार लाते रहना,
बाग़ो में कलियों को खिलाते रहना,
अपनीं खुशबू से सदा घर-आंगन को महका के,
हे माँ लक्ष्मीं तुम सदा हमारे द्वार आते रहना
कवि मनीष
प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...
No comments:
Post a Comment