जो ठान ले मन में तू,
बस वही तू कर,
ऐ इन्सान तू अपनें,
ख़्वाबों से बातें कर,
कोई कहे कुछ भी तुझे,
बस तू अपनीं धुन में रह,
अपनें हौसले को इक्कठा कर,
तू पूरी ताक़त से लड़,
ऐ इन्सान तू सदा,
ख़ुद पे यक़ीन कर
जो ठान ले मन में तू,
बस वही तू कर,
जो ठान ले मन में तू,
बस वही तू कर,
ऐ इन्सान तू अपनें,
ख़्वाबों से बातें कर,
ऐ इन्सान तू अपनें,
ख़्वाबों से बातें कर,
ऐ इन्सान तू अपनें,
ख़्वाबों से बातें कर
कवि मनीष
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