Saturday, 20 July 2019

जो ठान ले मन में तू..

जो ठान ले मन में तू,
बस वही तू कर,
ऐ इन्सान तू अपनें,
ख़्वाबों से बातें कर,

कोई कहे कुछ भी तुझे,
बस तू अपनीं धुन में रह,
अपनें हौसले को इक्कठा कर,
तू पूरी ताक़त से लड़,

ऐ इन्सान तू सदा,
ख़ुद पे यक़ीन कर
जो ठान ले मन में तू,
बस वही तू कर,

जो ठान ले मन में तू,
बस वही तू कर,
ऐ इन्सान तू अपनें,
ख़्वाबों से बातें कर,

ऐ इन्सान तू अपनें,
ख़्वाबों से बातें कर,
ऐ इन्सान तू अपनें,
ख़्वाबों से बातें कर 
कवि मनीष 

No comments:

Post a Comment

प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...