ज्ञान की ज्योत हर ओर जलानें वाली, अंधियारे को उजाले में बदलनें वाली, हे विद्यादायिनी माँ तुम्हारी जय हो, तुम सदा लिखते रहना आशाओं की कहानी
कवि मनीष
प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...
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