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प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...
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चूमता है अमरत्व मस्तक, उनका जो होतें हैं शहीद मातृभूमि पर, होता है स्वर्णिम जीवन उनका, विजय पताका लहराते हैं जो शत्रु के वक्ष ...
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जब है आती रात अमावस की कुछ सूझता नहीं, कहाँ छुपी है पूनम ये दिखता नहीं, इन्सान की ग़लती की सज़ा हर कोई है भुगतता, पर इन्सान को तो अपनें स्वा...
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