Saturday, 9 November 2019

जय श्री राम

राम नाम के नाम से आज फिर गूंजा जग सारा,
आज से नभ केसरी होगा और होगा केसरी हर सितारा,
राम लला की आज से गूंजेगी किलकारियाँ,
आज से अयोध्या हुआ श्री राम जन्म भूमि कहेगा जग सारा

जय श्रीराम 
कवि मनीष 

Friday, 8 November 2019

हमार देस बा वीरन के देस..

हमार देस बा,
बीरन के देस,
जईसे परबत बा सारा

कउन झुका सकअ हअ हमरा,
हम तअ हीं सूरज-सितारा,

अँखियन जे उठाई,
उ जान से जाई,
जुबां जो चलाई,
ओकर जुबां कट जाई,

हमार देस बा बीरन के देस,
जईसे परबत बा सारा,
कउन झुका सकअ हअ हमरा,
हम तअ हीं सूरज-सितारा,

आपन ताक़त से हम,
परवत हिला दीं,
गगन के हम झुका दीं,

हमरा आगे कउन टिकी,
हम तअ हीं भारत माई के दुलारा,

हमार देस बा वीरन के देस,
जईसे परबत बा सारा,

कउन झुका सकअ ल हमरा,
हम तअ हीं सूरज-सितारा

कवि मनीष 

Tuesday, 5 November 2019

देखा ई रंग-बिरंग के चूड़ियन,
जईसे रंग-रंगिलन बादलन से,
रंग गईल बाटे गगन,

पहिन लअ हमार हथियन से,
हौले-हौले सजन,
देखा ई रंग-बिरंग के चूड़ियन,

हम पहिनम तोहरे हथियन,
से ई चूड़ियन,
तू ह हमार रंग-रंगिलन सजन,

तोहार आँखियन में बाटे,
प्यार बेशुमार ऐ सजन,
चलअ नेह के नईया मअ,
उड़ चलीं हम गगन,

देखा ई रंग-बिरंग के चूड़ियन,
जईसे रंग-रंगिलन बादलन से,
रंग गईल बाटे गगन 

कवि मनीष 
(मनीष कुमार)



कुछ मैं कहूँ, कुछ तुम कहो..

प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...