Saturday, 30 November 2019
Friday, 29 November 2019
है मंज़िल से होता उसी का वास्ता,
जो बस आत्मविश्वास के साथ है बढ़ता रहता
कवि मनीष
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संसार को जो हैं देखते प्रेम के चश्मे से बार-बार,
उन्ही के आशियानें में है लौट के आती बहार बार-बार
कवि मनीष
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भंवरे नें कहा प्रेम की गली में है तेरा इंतज़ार,
सुनते हीं गुल के चेहरे पर बिख़र गई बहार
कवि मनीष
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Thursday, 28 November 2019
Tuesday, 26 November 2019
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प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...
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नया साल,नया जीवन लाए, उमंगो से भरा मौसम लाए, वसंत-बहार और छाया रहे सावन, जीवन बाग में हर रंग के फूल खिलाए कवि मनीष ************************...
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हर मासूम दिल में बसे सिर्फ़ मौसम ए बहार, मुबारक़ हो आप सभी को बाल दिवस का त्यौहार कवि मनीष


