Saturday, 7 December 2019

कवि मनीष 
जो है करता अपनें की मन की सवारी,
वही पाता है जीवन में खुशहाली

कवि मनीष 

Friday, 6 December 2019

जेहके निरमल बाटे मन,
ओहके जिनगी बाटे रंग-बिरंग के उपवन

कवि मनीष 
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Thursday, 5 December 2019

सूरज की गरमी भी बरसाती है शीतलता,
जो भरते हैं जीवन में सत्यता 

कवि मनीष 

Wednesday, 4 December 2019

है होता उज्ज्वल भविष्य उनका,
जो करते हैं उपयोग सोंच-समझ के धन का

कवि मनीष 
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Monday, 2 December 2019

है जिसमें आत्म सम्मान नहीं, है वो मुर्दा समान,
है जिसमें स्वाभिमान नहीं, है निर्थक उसका आत्म सम्मान

कवि मनीष 
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Sunday, 1 December 2019



ख़ुमार ज़िन्दगी का है चढ़ जाता जिनको,
बनके दिवाकर करते हैं वो रोशन नभ को

कवि मनीष 
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प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...