Tuesday, 15 October 2019
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प्रेम जब पहुँचे हिर्दय की गहराई तक, पराकाष्ठा पहुँचे उसकी नभ की ऊँचाई तक, प्रेम अगर रहे निर्मल गंगा माई के जैसे, वो प्रेम पहुँचे जटाधारी के ...
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हँसना,हँसाना है, जीवन का अनमोल उपहार, ये तो है, जीवन का अनुपम श्रृंगार, हँसनें-हँसानें बग़ैर जीवन में वसंत आता नहीं, बग़ैर इसके है...
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तू ना रूकेगा कभी, तू ना झुकेगा कभी, सामनें पहाड़ हो, नदि विशाल हो, तू है शेर ए हिन्द, तू है जलाल ए वतन, तू ना रूकेगा कभी, ...
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नया साल,नया जीवन लाए, उमंगो से भरा मौसम लाए, वसंत-बहार और छाया रहे सावन, जीवन बाग में हर रंग के फूल खिलाए कवि मनीष ************************...
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